Tuesday, February 10, 2009

गिरा चुपके से मौन एक आँसू….

गिरा चुपके से मौन एक आँसू….
..आँसू यह कि पीछे अश्रु धार नहीं
विह्वल दूत है यह, दिल का गुबार नहीं
एक बूँद विस्मय है या दुख का सागर पूरा,
अकेलेपन का साथी है या कोई स्वप्न अधूरा
कोई पराजय है या किसी वस्तु का खोना,
या किसी ने छू दिया है मर्मस्पर्शी कोना
या कोई प्रसन्नता है जो दिल मे ना समाई,
आज अकारण ही क्यों आँखें भर आईं
इन प्रश्नों का उत्तर तो मन भी ना दे पाए,
जहाँ से उद्वेलित हो अश्रु आँखों तक आए

2 comments:

hemjyotsana said...

ek aanshu naajane kitne roop liye hota hai,
kabhi kis bhaav mein to kabhi kis bhav mein ,
Maun aanshu ke bhav vakaai man bhi nahi jaan paataa
sundar rachna ke liye badhaai

Rajat Narula said...

bahut sunder rachna hai, simply brilliant...

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